लिंगानुशासन - डॉ. नरेश झा / Linganushasan - Dr. Naresh Jha - भारतीय संस्कृतप्रभा

Breaking

Home Top Ad

Responsive Ads Here

Post Top Ad

Responsive Ads Here

Wednesday, June 30, 2021

लिंगानुशासन - डॉ. नरेश झा / Linganushasan - Dr. Naresh Jha

 
लिंगानुशासन - डॉ. नरेश झा / Linganushasan - Dr. Naresh Jha



लिंगानुशासन - डॉ. नरेश झा / Linganushasan - Dr. Naresh Jha, Linganushasan, Sutrapath, vyakran ,vyakaran , Panini vyakran,
Ashish Choudhury

पुस्तक का नाम - लिंगानुशासनम् / Linganushasan
रचयिता -            महर्षि पाणिनि
व्याख्याकार : -.    संपादक - डॉ. नरेश झा
विषय -                संस्कृत व्याकरण
विशेष :-              आप सभी किसी भी पुस्तक को पढ़ने 
                          और download करने के लिए                                    blue बटन पे क्लिक करे ।

                            - : Download  PDF :-

लिंगानुशासन का परिचय :-

                                          लिङ्गानुशासन, पाणिनीय पंचांग व्याकरण का एक भाग है। लोक के अनुसार लिङ्ग (पुँल्लिंग, स्त्रीलिंग, नपुंसकलिंग) का अनुशासन करने वाला शास्त्र लिङ्गानुशासन कहलाता है। (लिङ्गानाम् अनुशासनं क्रियतेऽनेनेति लिङ्गानुशासनम् । ) पाणिनी प्रणीत इस शास्त्र में संस्कृत भाषा में व्यवहृत शब्दों के लिङ्ग का उपदेश किया गया है ।

यह शास्त्र भी छः अधिकारों में विभक्त है। इस शास्त्र में कुल १९१ सूत्र हैं।

१. स्त्रीलिङ्गाधिकार - ३४ सूत्र
२. पुँल्लिङ्गाधिकार - ८३ सूत्र
३. नपुंसकलिङ्गाधिकार - ५५ सूत्र
४. स्त्रिलिङ्गपुँल्लिङ्गाधिकार - ५ सूत्र
५. पुँल्लिङ्गनपुंसकलिङ्गाधिकार - ७ सूत्र
६. अविशिष्टलिङ्गाधिकार - ७ सूत्र 

Author of the page:- Ashish Choudhury
Contact us :- bharatiyasanskrtaprabha@gmail.com

   

No comments:

Post a Comment

Post Bottom Ad

Responsive Ads Here

Pages