लिंगानुशासन - डॉ. नरेश झा / Linganushasan - Dr. Naresh Jha
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| Ashish Choudhury |
पुस्तक का नाम - लिंगानुशासनम् / Linganushasan
रचयिता - महर्षि पाणिनि
व्याख्याकार : -. संपादक - डॉ. नरेश झा
विषय - संस्कृत व्याकरण
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लिंगानुशासन का परिचय :-
लिङ्गानुशासन, पाणिनीय पंचांग व्याकरण का एक भाग है। लोक के अनुसार लिङ्ग (पुँल्लिंग, स्त्रीलिंग, नपुंसकलिंग) का अनुशासन करने वाला शास्त्र लिङ्गानुशासन कहलाता है। (लिङ्गानाम् अनुशासनं क्रियतेऽनेनेति लिङ्गानुशासनम् । ) पाणिनी प्रणीत इस शास्त्र में संस्कृत भाषा में व्यवहृत शब्दों के लिङ्ग का उपदेश किया गया है ।
यह शास्त्र भी छः अधिकारों में विभक्त है। इस शास्त्र में कुल १९१ सूत्र हैं।
१. स्त्रीलिङ्गाधिकार - ३४ सूत्र
२. पुँल्लिङ्गाधिकार - ८३ सूत्र
३. नपुंसकलिङ्गाधिकार - ५५ सूत्र
४. स्त्रिलिङ्गपुँल्लिङ्गाधिकार - ५ सूत्र
५. पुँल्लिङ्गनपुंसकलिङ्गाधिकार - ७ सूत्र
६. अविशिष्टलिङ्गाधिकार - ७ सूत्र
Author of the page:- Ashish Choudhury
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